माँ बगलामुखी: दस महाविद्याओं में आठवीं विद्या
धार्मिक जानकारी • सामान्य परिचय
सनातन धर्म में दस महाविद्याओं का विशेष महत्व है, जिनमें माँ बगलामुखी आठवीं महाविद्या हैं। इन्हें 'पीताम्बरा' भी कहा जाता है क्योंकि इन्हें पीला रंग अत्यंत प्रिय है। भक्तजन माँ की उपासना विशेष रूप से शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने, वाक्-सिद्धि, मुकदमों में सफलता और बुरी शक्तियों से रक्षा के लिए करते हैं।
माता बगलामुखी का स्वरूप अत्यंत तेजस्वी है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, 'बगला' शब्द 'वल्गा' का अपभ्रंश है, जिसका अर्थ है 'लगाम'। माँ बगलामुखी अपने भक्तों के विरोधियों की वाणी, बुद्धि और गति को स्तम्भित (रोक) कर देती हैं। इनकी पूजा में हल्दी की माला और पीले वस्त्रों का उपयोग होता है।
नोट: यह एक सामान्य धार्मिक जानकारी है। विशिष्ट मंदिर के अनुष्ठान और नियम मंदिर प्रशासन द्वारा निर्धारित किए जाते हैं।
